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हस्त रेखाओं से कैसे होकर जाता है भाग्य का रास्ता?

प्रत्येक मनुष्य के हाथ की रेखाओं में उसका भूत भविष्य वर्तमान छिपा हुआ होता है| मानव के हाथ की रेखाओं को मुख्य रूप से सात भागों में बांटा गया है क्योंकि प्रत्येक मानव के हाथ में सात रेखाएं प्रधान होती है जिनके द्वारा हम मनुष्य के भूत भविष्य वर्तमान का हस्त रेखा शास्त्र के अध्ययन द्वारा ज्ञान कर सकते हैं | Famous astrologers इसी के द्वारा भाग्य का वर्णन कर पाते है और जातकों को ये बता पाते है की उनके जीवन और भाग्य में क्या पररिस्थिति और बदलाव आने वाले है| आमतौर पर व्यक्ति के जीवन में जब परेशानियां आने लगती हैं, काम बनते नहीं हैं। अच्छा करने जाते हैं और बुरा होने लगता है। नौकरी में प्रमोशन नहीं मिलता है। व्यापार में घाटा होता है या किसी तरह की कोई शारीरिक परेशानी आती है तो व्यक्ति अपनी कुंडली का अध्ययन करवाता है। Kundli maker उन्हें उनकी कुंडली देखकर समाधान सुझाते है| हस्तरेखा में ग्रहों के पर्वत, उनके उभार, विभिन्न रेखाओं पर मौजूद त्रिकोण, क्रॉस, बिंदु, चतुर्भुज, नक्षत्र या अन्य चिन्ह देखकर भविष्य कथन किया जाता है। गजलक्ष्मी योग यदि दोनों हाथों में भाग्य रेखा मणिबंध से प्रारंभ होकर सीधी शनि पर्वत पर जाती हो तथा सूर्य पर्वत पूर्ण विकसित, लालिमा लिए हुए हो और उस पर सूर्य रेखा भी बिना कटी-फटी, पतली और स्पष्ट हो। शुभकर्तरी योग

क्या महत्व है राशियाँ का आपके जीवन में?

· जानिए राशिओ का महत्व -ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भी किसी बच्चे का जन्म होता है तो उसी समय उसके भाग्य का फैसला उसी समय हो जाता है kundali maker द्वारा । बच्चे के जन्म के समय ही ग्रहों और नक्षत्रों से उसकी राशि का निर्धारण हो जाता है। kundali matching ज्योतिष में राशि का विशेष महत्व होता है। राशियां ही जातक के जीवन पर गहरा प्रभाव डालती हैं। जातक की कुंडली में राशि का आकलन कर व्यक्ति के जीवन में उसकी सफलता और असफलता का पता चलता है। इसके अलावा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह भी जानकारी मिलती है कि किस राशि के लोग ज्यादा भाग्यशाली होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सभी 12 राशियों में कुछ राशियां ऐसी होती हैं जो ज्यादा भाग्यशाली और उनमें जल्दी धनवान बनने के गुण होता है। · राशियाँ की जानकारी- राशियाँ राशिचक्र के उन बारह बराबर भागों को कहा जाता है जिन पर ज्योतिषी आधारित है। हर राशि सूरज के क्रांतिवृत्त (ऍक्लिप्टिक) पर आने वाले एक तारामंडल से सम्बन्ध रखती है और उन दोनों का एक ही नाम होता है - जैसे की मिथुन राशि और मिथुन तारामंडल। यह बारह राशियां हैं - 1. मेष राशि 2. वृष राशि 3. मिथुन राशि 4. कर्क राशि